सिलौंडी क्षेत्र की सड़कों पर घूमते आवारा मवेशी बने लोगों के लिए मुसीबत, दुर्घटनाओं और फसल नुकसान से ग्रामीण परेशान।
रास्ते जाम, दुर्घटनाओं का खतरा, खेतों में फसलें चौपट,ग्रामीणों ने कांजी हाउस की मांग दोहराई।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर mp:
सिलौंडी क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में आवारा मवेशियों की समस्या दिनोंदिन विकराल होती जा रही है। इन मवेशियों के झुंड अब गांव की गलियों, मुख्य बाजार, बस स्टैंड और मुख्य सड़कों पर आमतौर पर देखे जा सकते हैं। इससे न केवल यातायात में बाधा उत्पन्न हो रही है बल्कि लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
सिलौंडी, दशरमन, कछार गांव, बड़ा, बस स्टैंड क्षेत्र व आसपास की बस्तियों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आवारा पशु खुलेआम घूमते हैं। ये मवेशी सड़कों पर बैठ जाते हैं, जिससे आमजन, स्कूली बच्चे, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को बार-बार असुविधा का सामना करना पड़ता है।
रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है। हाल ही की घटना में एक युवक सड़क पर खड़ी गाय को बचाने के प्रयास में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। ऐसे कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनकी सूचना ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन को दी है, परंतु अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
यह समस्या केवल यातायात तक सीमित नहीं है, बल्कि अब किसानों के लिए यह एक नई चुनौती बन चुकी है। खेतों में बोई गई धान,क़ी फसलें आवारा मवेशियों द्वारा चर ली जा रही हैं। इससे हजारों रुपये की फसल बर्बाद हो चुकी है और किसान आर्थिक तंगी की कगार पर पहुंच रहे हैं।
स्थानीय किसानों ने बताया कि "हमने दिन-रात मेहनत करके फसल बोई, लेकिन अब ये मवेशी खेत में घुसकर सब बर्बाद कर देते हैं। हमें न फसल मिल रही है, न मुआवज़ा। प्रशासन बस आश्वासन दे रहा है।"
एक अन्य नागरिक ने कहा, "सड़क पर मवेशी बैठे रहते हैं। बच्चे स्कूल जाते हैं तो डर लगता है कि कहीं जानवर कुछ कर न दें। कोई अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहा।"
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि पहले की तरह कांजी हाउस (आवारा मवेशियों को रखने की व्यवस्था) फिर से शुरू किया जाए। पूर्व में जब कांजी हाउस संचालित था, तब सड़कों पर इस प्रकार की समस्याएं नहीं थीं।
हालांकि मुख्यमंत्री द्वारा कुछ माह पूर्व ही समस्त जिलों के कलेक्टरों को आदेशित किया गया था कि आवारा पशुओं की पहचान कर उनके स्वामियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। कलेक्टर कटनी द्वारा यह आदेश ग्राम पंचायतों को जारी किया गया, परंतु जमीनी स्तर पर न तो पहचान की गई और न ही किसी के विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई।
ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि, सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारी इस विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं। पंचायतों में बैठकें तो होती हैं, पर आवारा पशुओं की समस्या का समाधान अब तक किसी के एजेंडे में नहीं दिख रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को विवश होंगे। उनका कहना है कि मवेशियों से न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं की वजह से लोगों की जान भी खतरे में पड़ रही है।
अब प्रशासन से ग्रामीणों की उम्मीद बस यही है कि जल्द ही कांजी हाउस की स्थापना कर आवारा पशुओं को सड़कों से हटाया जाए, पशु स्वामियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, और खेतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि जनजीवन सामान्य हो सके और किसान फिर से निर्भय होकर खेतों में कार्य कर सकें।
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