उमरिया पान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा,मरीज बेहाल,जनपद सदस्य व कांग्रेस नेता ने किया औचक निरिक्षण।

 उमरिया पान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा,मरीज बेहाल,जनपद सदस्य व कांग्रेस नेता ने किया औचक निरिक्षण।

अस्पताल में गंदगी, डॉक्टर नदारद, मरीजों की नहीं कोई सुनवाई।  

कटनी, उमरिया पान:

उमरिया पान के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत दिनोंदिन बदतर होती जा रही है। सरकारी अस्पतालों का मुख्य उद्देश्य गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त एवं उचित इलाज उपलब्ध कराना होता है, लेकिन उमरिया पान अस्पताल इस उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।  

         अस्पताल में बदइंतजामी चरम पर:

अस्पताल परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे मरीजों को असहनीय बदबू का सामना करना पड़ता है। सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। अस्पताल में मरीजों के लिए बैड तो हैं, लेकिन बैड शीट तक उपलब्ध नहीं हैं। इससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्वच्छता के अभाव में अस्पताल में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।  

           डॉक्टर नदारद, मरीज परेशान:

अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति आम बात हो गई है। मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन वहां डॉक्टरों का कोई अता-पता नहीं रहता। यदि कोई डॉक्टर उपलब्ध भी होते हैं, तो उनका व्यवहार मरीजों के प्रति असंवेदनशील रहता है। मरीजों की परेशानी सुनने के बजाय वे टालमटोल करने लगते हैं, जिससे मरीजों को मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है।  

जनपद सदस्य और कांग्रेस नेता ने किया औचक निरीक्षण:

कल दिनांक 6/2/2025 को जब जनपद सदस्य शैलेन्द्र पौराणिक एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, परिवहन प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ दीक्षित अचानक अस्पताल पहुंचे, तो अस्पताल की दयनीय स्थिति देखकर वे हैरान रह गए। अस्पताल में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) समेत कोई भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं था। मरीज अपनी परेशानियां लेकर इधर-उधर भटकते नजर आए, लेकिन सुनवाई के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था।  

     अव्यवस्थाओं पर जताई कड़ी नाराजगी:

अस्पताल की अव्यवस्थाओं को देखते हुए जनपद सदस्य शैलेन्द्र पौराणिक ने अस्पताल परिसर में फैली गंदगी, बैड शीट की अनुपलब्धता, सफाई व्यवस्था की बदहाली, डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की लापरवाही को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इन समस्याओं को लेकर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के नाम एक लिखित शिकायत अस्पताल के कर्मचारी संजय द्विवेदी को सौंपी और जल्द से जल्द सुधार की मांग की।  

     सरकारी अस्पताल होने का क्या फायदा?

सरकारी अस्पतालों का मुख्य उद्देश्य आम जनता को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन जब मरीजों को यहां सही इलाज नहीं मिल रहा, डॉक्टर मौजूद नहीं रहते, सफाई की व्यवस्था लचर है और मरीजों को निजी अस्पतालों या झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है, तो इस अस्पताल के अस्तित्व का क्या औचित्य रह जाता है?

                प्रशासन कब लेगा सुध?

जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं देना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। अगर जल्द ही इस अस्पताल की बदहाल स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो लोगों का सरकारी अस्पतालों से भरोसा उठ जाएगा। जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से ले और इस अस्पताल की दशा सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए।


प्रधान संपादक:अज्जू सोनी
संपर्क सूत्र:9977110734

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