संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती समारोह की धूम।
बरही नगर में शोभायात्रा, सिनगौड़ी में मंचीय सभा का ऐतिहासिक महोत्सव।
कटनी, बरही।
भारत भूमि को संतों की तपोस्थली माना जाता है, जहां अनेकों संतों ने जन्म लिया और समाज को नई दिशा दी। इन्हीं संतों में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी का विशेष स्थान है, जिनकी शिक्षाएं आज भी सभी धर्मों और समाज के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी जयंती हर वर्ष भव्य रूप से मनाई जाती है।
बरही नगर में निकली भव्य शोभायात्रा:
बरही नगर में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती के अवसर पर एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। नगरवासियों ने घोड़े के रथ पर झांकी सजाकर संपूर्ण नगर का भ्रमण किया। शोभायात्रा मेला मैदान होते हुए विजयनाथ धाम पहुंची, जहां स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के मंदिर में ध्वजारोहण किया गया। गाजे-बाजे के साथ जयकारे लगाते हुए श्रद्धालुओं ने प्रसाद वितरण कर कार्यक्रम का समापन किया। इस शोभायात्रा में प्रमुख रूप से मिट्ठू लाल पार्षद, सुंदर चौधरी, कमलेश, राकेश, नरेश, संदीप, अमित, संतलाल, शोभा, मोहित चौधरी आदि की अहम भूमिका रही।
सिनगौड़ी में मंचीय सभा, हजारों की उपस्थिति:
बरही से लगभग 10 किलोमीटर दूर सिनगौड़ी में एक विशाल मंचीय सभा का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस भव्य समारोह के मुख्य अतिथि इंडियन पब्लिक स्कूल के चेयरपर्सन कामता जायसवाल रहे, जबकि अध्यक्षता धनपत चौधरी ने की।
अपने उद्बोधन में कामता जायसवाल ने संत रविदास जी के विचारों को याद करते हुए कहा—
"ऐसा चाहू राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न।
छोटे-बड़े सब सम बसें, तब रविदास रहे प्रसन्न।।
उन्होंने संत रविदास जी के समता, स्वतंत्रता और भाईचारे के संदेश को समाज में फैलाने का आह्वान किया।
भंडारे के साथ हुआ समापन:
कार्यक्रम का सफल संचालन गुलाब दास जी द्वारा किया गया। श्रद्धालुओं के लिए भोजन भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। संत रविदास जी की जयंती पर हुए इस आयोजन ने समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश दिया।
