स्वजातीय स्वर्णकार समाज की महिला इकाई ने किया "हरियाली तीज उत्सव" का आयोजन, कई महिलाओं को किया सम्मानित।
कटनी:-स्वजातीय स्वर्णकार समाज महिला इकाई जिला कटनी द्वारा आज 10 अगस्त शनिवार को दोपहर 3 बजे से भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती के पुनर्मिलन के संयोग "हरियाली तीज उत्सव", का आयोजन स्थानीय बरही रोड स्थित ज़ायका रेस्टोरेंट में किया गया। कार्यक्रम आयोजक एवं समाज की जिला अध्यक्ष सारिका सोनी द्वारा बताया गया कि इस सांस्कृतिक उत्सव में समाज की मातृशक्ति के भक्ति भाव पूर्ण मनोरंजन हेतु विभिन्न कार्यक्रम यथा भजन अंताक्षरी, एकल प्रस्तुति, सांस्कृतिक गायन एवं नृत्य, विभिन्न इनडोर खेल प्रतियोगिताओं, के साथ साथ अलग अलग आयु वर्ग में सौन्दर्य प्रतियोगिता (ब्यूटी प्रेजेन्ट) का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में रमा सोनी को "मानसून क्वीन",प्रीति सोनी को "रैनी क्वीन", एवं मोनिका सोनी को "तीज़ क्वीन" का खिताब दिया गया। विभिन्न इनडोर खेलों में प्रिया सोनी , सुषमा सोनी, सविता सोनी को विजेता घोषित कर पुरस्कार प्रदान किये गये।स्वजातीय स्वर्णकार समाज की सभी महिला, बहनों ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुलाब देवी सोनी, कार्यक्रम अध्यक्ष सावित्री सोनी, विशिष्ट अतिथि रमा सोनी, सुषमा सोनी रहीं। प्रतियोगिता की जज शशि ठाकुर एवं विभा गुप्ता रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ, अतिथियों द्वारा भोलेनाथ एवं महाराजा अजमीढ़ देव की पूजाअर्चना दीप प्रज्वलन एवं आरती से किया गया।अध्यक्ष एवं सभी पदाधिकारियों द्वारा उपस्थित अतिथियों एवं जजों का पुष्प माला से सम्मान एवं अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में वार्षिका मुनमुन सोनी, ,राधा सोनी , पूजा सोनी उपाध्यक्ष, प्रीति सोनी सचिव , सुशीला सोनी कोषाध्यक्ष, पुष्प लता सोनी सह कोषाध्यक्ष , रेखा सोनी, साधना, रश्मि, अनीता सोनी प्रचार मंत्री, प्रियंका सोनी, ज्योति सोनी मीडिया प्रभारी, शशि , मंजूलता , माया, मिथिलेश, हेमा, नीलम , तनुजा, उमा, रश्मि, अनीता, लक्ष्मी, मोनिका, नीता, संगीता सोनी आदि उपस्थित रहीं। शालिनी सोनी , प्रिया शिव शक्ति मिलन समिति एवं पुष्प गिरी परिवार से निगम, रघुवंशी,रक्षा, तनु दुबे उपस्थित रहीं। कार्यक्रम उपरांत सभी सदस्यों द्वारा एकस्वर में पर्यावरण संरक्षण, समाज की एकता और उन्नति हेतु संकल्प लिया गया एवं बैठक का समापन " भोलेनाथ, पार्वती माता, श्री राम एवं महाराजा अजमीढ़ देव" के जयकारों के उद्घोष के साथ किया गया।
