दो माह पहले उमरिया पान नायब तहसीलदार ने ग्राम पंचायत को भेजा पत्र,जर्जर मकान पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं।
वार्ड क्रमांक 17 में हादसे का खतरा,पटवारी की जांच में अत्यधिक जर्जर मिला भवन,प्रशासनिक निर्देश के बावजूद ग्राम पंचायत की कार्रवाई पर सवाल।
उमरियापान। ग्राम उमरियापान के वार्ड क्रमांक 17 में स्थित एक अत्यधिक जर्जर मकान को लेकर जनसुरक्षा का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जर्जर भवन से संभावित जनहानि की आशंका को लेकर शिकायतकर्ता अभिषेक तिवारी, पिता आर.के. तिवारी द्वारा प्रशासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बाद नायब तहसीलदार वृत्त उमरियापान, तहसील ढीमरखेड़ा द्वारा ग्राम पंचायत उमरियापान के सरपंच एवं सचिव को पत्र भेजकर आवश्यक अग्रिम कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। बताया जा रहा है कि नायब तहसीलदार का पत्र ग्राम पंचायत को भेजे लगभग दो माह बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जर्जर भवन को लेकर अपेक्षित कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे अब ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
प्राप्त प्रशासनिक पत्र के अनुसार शिकायतकर्ता अभिषेक तिवारी द्वारा 24 जून 2026 को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ढीमरखेड़ा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन में वार्ड क्रमांक 17 में स्थित जर्जर मकान से किसी भी समय जनहानि अथवा अप्रिय घटना की आशंका व्यक्त करते हुए संबंधित पक्ष को अवगत कराने तथा आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की गई थी। शिकायत के बाद संबंधित हल्का पटवारी से मौके की जांच भी कराई गई और जांच प्रतिवेदन प्रशासन को प्रस्तुत किया गया।
पटवारी की मौका जांच रिपोर्ट में उक्त मकान को अत्यधिक जर्जर अवस्था में बताया गया है। प्रशासनिक पत्र में दर्ज विवरण के अनुसार संबंधित भवन प.ह.नं. 17, ग्राम उमरियापान, तहसील ढीमरखेड़ा, जिला कटनी में स्थित आबादी भूमि खसरा नंबर 755/1 रकबा 16.1240 तथा प्लाट क्रमांक 997 रकबा 101 वर्गमीटर से संबंधित बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेखित है कि भूमि वर्तमान अभिलेख में मध्यप्रदेश शासन मद में दर्ज है।
मौका जांच के दौरान उक्त भूमि पर मीना पति मुकेश असाटी तथा आरती पति दिनेश असाटी का मकान निर्मित पाया गया। पटवारी के प्रतिवेदन के अनुसार मकान अत्यधिक जर्जर स्थिति में है तथा मौके पर घर खाली पाया गया। रिपोर्ट में जर्जर भवन के कारण किसी भी समय जनहानि अथवा अप्रिय घटना घटित होने की संभावना भी व्यक्त की गई है।
यही वह बिंदु है जिसने मामले को गंभीर बना दिया है। एक ओर शिकायत के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर मौका जांच कराई गई, वहीं दूसरी ओर नायब तहसीलदार द्वारा ग्राम पंचायत को संबंधित शिकायत एवं पटवारी की जांच रिपोर्ट भेजकर आबादी क्षेत्र में स्थित भवन के संबंध में आवश्यक अग्रिम कार्रवाई के लिए पत्राचार किया गया। लेकिन पत्र भेजे जाने के लगभग दो माह बाद भी यदि मौके पर सुरक्षा संबंधी ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ग्राम पंचायत स्तर पर मामले को लेकर क्या कदम उठाए गए।
आवेदक के अनुसार इस मकान की स्थिति पिछले लगभग 8-9 वर्षों से खराब है और उचित रखरखाव के अभाव में भवन लगातार जर्जर होता गया। आवेदक ने प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन देकर मांग की थी कि मौके पर निरीक्षण कर भवन की वास्तविक स्थिति का परीक्षण कराया जाए और यदि भवन खतरनाक पाया जाता है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। आवेदन में यह भी आशंका व्यक्त की गई थी कि भवन का कोई हिस्सा अचानक गिरने की स्थिति में आसपास रहने वाले लोगों अथवा वहां से गुजरने वाले व्यक्तियों को नुकसान हो सकता है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि संबंधित भवन आबादी क्षेत्र में स्थित बताया गया है। आसपास लोगों के आवास हैं और क्षेत्र में लोगों का आवागमन भी होता है। ऐसे में यदि जर्जर दीवार, छत या भवन का कोई अन्य हिस्सा अचानक गिरता है तो दुर्घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि भवन से वास्तविक खतरे की स्थिति और उसके संबंध में अंतिम तकनीकी आकलन संबंधित सक्षम अधिकारी या विशेषज्ञ निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
आवेदक का कहना है कि संभावित खतरे की जानकारी प्रशासन को पहले ही लिखित रूप से दी जा चुकी है। शिकायत के बाद पटवारी की मौका जांच भी हो चुकी है और नायब तहसीलदार द्वारा ग्राम पंचायत को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा जा चुका है। ऐसे में अब सवाल यह है कि ग्राम पंचायत द्वारा पत्र प्राप्त होने के बाद क्या कार्रवाई की गई और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उसका कारण क्या है।
दो माह से कार्रवाई का इंतजार
नायब तहसीलदार के पत्राचार के बाद भी लगभग दो माह का समय गुजर जाना इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। शिकायतकर्ता की ओर से पहले ही संभावित दुर्घटना की आशंका जताई गई थी। इसके बाद प्रशासनिक जांच में भी भवन की जर्जर स्थिति का उल्लेख सामने आया। बावजूद इसके यदि ग्राम पंचायत स्तर पर भवन को लेकर सुरक्षा संबंधी कदम नहीं उठाए गए हैं तो यह स्थिति निश्चित रूप से गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े करती है।
आवेदक की ओर से यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जब संभावित खतरे की जानकारी प्रशासन को पहले ही दी जा चुकी है और संबंधित अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत को कार्रवाई के लिए पत्र भी भेज दिया गया है, तो फिर अब तक जर्जर भवन के मामले में क्या कार्रवाई हुई। यदि कोई कार्रवाई की गई है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक होना भी आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित शिकायत को गंभीरता से लिया गया है।
हादसा हुआ तो जवाबदेही तय करने की मांग
शिकायतकर्ता अभिषेक तिवारी ने अपनी शिकायत में यह भी मांग की थी कि यदि भविष्य में जर्जर भवन अथवा उसके किसी हिस्से के गिरने से कोई जनहानि या गंभीर दुर्घटना होती है तो संबंधित स्तर पर जवाबदेही निर्धारित की जानी चाहिए। आवेदक का तर्क है कि प्रशासन को संभावित खतरे की जानकारी काफी पहले लिखित रूप में दी जा चुकी है। ऐसे में शिकायत के बाद भी यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते और भविष्य में कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी तय होना चाहिए।
हालांकि, किसी भी अधिकारी अथवा पंचायत की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने से पहले यह देखना जरूरी होगा कि शिकायत और नायब तहसीलदार के पत्र के बाद ग्राम पंचायत द्वारा वास्तव में कौन-कौन से कदम उठाए गए, क्या कोई नोटिस जारी किया गया, क्या स्थल निरीक्षण हुआ और क्या भवन को लेकर कोई सुरक्षा व्यवस्था की गई। इन तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही जवाबदेही के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्राम पंचायत की भूमिका पर निगाह
चूंकि नायब तहसीलदार द्वारा ग्राम पंचायत उमरियापान को संबंधित शिकायत और पटवारी की मौका जांच रिपोर्ट आवश्यक अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजी जा चुकी है, इसलिए अब इस मामले में ग्राम पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। दो माह का समय बीतने के बाद भी यदि भवन की जर्जर स्थिति जस की तस है तो ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर प्रशासनिक पत्राचार के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया कहां तक पहुंची।
आवेदक की मांग है कि ग्राम पंचायत एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए जर्जर मकान की स्थिति के संबंध में तत्काल आवश्यक कदम उठाएं। यदि भवन वास्तव में जनसुरक्षा के लिए खतरा है तो आसपास के लोगों की सुरक्षा के लिए नियमानुसार व्यवस्था की जाए तथा भवन के संबंध में सक्षम स्तर से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल नायब तहसीलदार द्वारा ग्राम पंचायत को भेजे गए पत्र, पटवारी की मौका जांच रिपोर्ट और शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत आवेदन के बाद भी मामले का पूरी तरह समाधान होना बाकी है। अब देखना यह होगा कि ग्राम पंचायत उमरियापान इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई करती है। सवाल यही है कि प्रशासनिक पत्राचार और खतरे की सूचना के बावजूद यदि कार्रवाई में और देरी होती है, तो क्या किसी संभावित हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेगा, या उससे पहले ही जर्जर भवन को लेकर आवश्यक सुरक्षा कदम उठाए जाएंगे।


