543.19 फीसदी आय से अधिक संपत्ति! सरकारी क्लर्क के पांच ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा।
सिवनी के क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ असिस्टेंट ग्रेड-2 सुभाष शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर कार्रवाई, जबलपुर और सिवनी में सुबह 5:30 बजे एक साथ शुरू हुई तलाशी।
सिवनी/जबलपुर। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में लोकायुक्त पुलिस ने सिवनी जिले में पदस्थ एक सरकारी क्लर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जबलपुर और सिवनी में एक साथ पांच ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रशिक्षण केंद्र, सिवनी में पदस्थ असिस्टेंट ग्रेड-2 सुभाष शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत के आधार पर की गई।
जानकारी के अनुसार लोकायुक्त पुलिस को सुभाष शर्मा के खिलाफ उनकी ज्ञात आय की तुलना में अत्यधिक संपत्ति अर्जित किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के प्रारंभिक सत्यापन में प्रथम दृष्टया तथ्य पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद लोकायुक्त की टीम ने शनिवार तड़के करीब 5:30 बजे जबलपुर और सिवनी में अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी कार्रवाई शुरू की।
प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाला आंकड़ा
लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान सामने आए प्रारंभिक आंकड़ों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। जांच में क्लर्क की संपत्ति और खर्च उसकी ज्ञात आय से करीब 543.19 प्रतिशत अधिक पाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि यह आंकड़ा जांच के दौरान सामने आया प्रारंभिक आकलन है और मामले की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक आय, संपत्ति और व्यय का अंतिम निर्धारण स्पष्ट हो सकेगा।
पांच ठिकानों पर एक साथ पहुंची टीमें
लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई को व्यापक स्तर पर अंजाम देते हुए जबलपुर और सिवनी स्थित कुल पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। अधिकारियों की टीमें दस्तावेज, संपत्ति से संबंधित कागजात, बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड सहित ऐसे सभी संभावित साक्ष्यों की जांच में जुटी रहीं, जिनसे आरोपी की आय और संपत्ति के वास्तविक स्रोतों का पता लगाया जा सके।
पत्नी के नाम पर संपत्तियों की भी जांच
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तलाशी के दौरान ऐसी संपत्तियों और दस्तावेजों की जानकारी भी सामने आई है, जिनमें कुछ संपत्तियां सुभाष शर्मा की पत्नी शीला शर्मा के नाम पर होना बताया जा रहा है। लोकायुक्त की जांच में अब यह भी देखा जा रहा है कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन का स्रोत क्या था और क्या इनका संबंध आरोपी की आय से है।
आय और संपत्ति के स्रोतों की होगी पड़ताल
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी सामान्यतः अधिकारी-कर्मचारी की वैध आय, सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन एवं अन्य ज्ञात आय, बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों, निवेश, पारिवारिक संपत्तियों तथा खर्चों का तुलनात्मक आकलन करती है। इसी आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि संपत्ति और खर्च ज्ञात वैध आय के अनुपात में हैं या नहीं।
अभी जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष आना बाकी
लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। तलाशी के दौरान जब्त दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कुल कितनी संपत्ति सामने आई, उसकी अनुमानित कीमत कितनी है और उसमें से कितनी संपत्ति को वैध आय से अर्जित माना जा सकता है।
543.19 प्रतिशत अधिक संपत्ति का प्रारंभिक आंकड़ा सामने आने के बाद यह मामला अब जांच के केंद्र में है। हालांकि जब तक जांच पूरी होकर सक्षम न्यायालय में आरोप सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक आरोपी को कानून के अनुसार निर्दोष माना जाएगा। लोकायुक्त की कार्रवाई को इसी जांच प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।


