श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा कृष्ण-सुदामा की अमर मित्रता का प्रसंग,भावविभोर हुए श्रद्धालु।

 श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा कृष्ण-सुदामा की अमर मित्रता का प्रसंग,भावविभोर हुए श्रद्धालु।

सुदामा चरित्र जीवन की कठिनाइयों से संघर्ष करने और सच्ची मित्रता निभाने की प्रेरणा देता है,श्री जगदेव बड़गैंया जी।

रीठी,ग्रामीण खबर एमपी।

कटनी जिले के रीठी विकासखंड अंतर्गत ग्राम खम्हरिया क्रमांक-1 स्थित परम पूज्य बाबा हरिदास जी के बंगले में समस्त यादव समाज एवं ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। सात दिवसीय कथा के अंतिम दिवस पर कथा व्यास परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 श्री जगदेव बड़गैंया जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और आदर्श जीवन के संदेश प्रदान किए।

कथा के दौरान महाराज श्री ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा माता देवकी के छह पुत्रों को पुनः लौटाने की लीला, सुभद्रा हरण प्रसंग तथा विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की अद्भुत मित्रता का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि जीवन के संघर्षों, धैर्य, आत्मसम्मान और सच्ची मित्रता का जीवंत उदाहरण है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति को अपने संस्कार, विश्वास और आत्मबल को नहीं छोड़ना चाहिए।

कथा व्यास ने बताया कि जब सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने बालसखा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे, तब उनके साधारण वेश-भूषा को देखकर द्वारपालों ने उन्हें भिक्षुक समझ लिया और प्रवेश से रोक दिया। किंतु जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय मित्र सुदामा के आगमन का समाचार सुना, वे अत्यंत भावुक होकर नंगे पांव ही राजमहल के द्वार की ओर दौड़ पड़े। वर्षों बाद अपने प्रिय सखा को सामने देखकर उन्होंने उन्हें हृदय से लगा लिया। यह दृश्य मित्रता, प्रेम और समर्पण का अनुपम उदाहरण बन गया।

महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता यह संदेश देती है कि सच्चे संबंध धन, पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और आत्मीयता से मजबूत होते हैं। भगवान ने अपने मित्र के सम्मान और स्नेह को सर्वोच्च स्थान देकर यह सिद्ध किया कि सच्ची मित्रता समय और परिस्थितियों से परे होती है।

कथा के दौरान प्रस्तुत कृष्ण-सुदामा की आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से झांकी पर पुष्प वर्षा कर भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। संपूर्ण कथा पंडाल कृष्णमय वातावरण से सराबोर हो उठा और उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर यादव समाज के पदाधिकारियों एवं ग्रामवासियों द्वारा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर उदयभान यादव, संतकुमार यादव, अशोक यादव, शेष कुमार यादव, कमलेश यादव, अनिल यादव, सुरेश विश्वकर्मा, रघुनंदन यादव, प्रीतम सिंह, रोशनी चंदन सिंह, सुक्खीलाल यादव सहित बड़ी संख्या में ग्राम एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। कथा श्रवण के लिए आसपास के गांवों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया और आयोजन की सराहना की।



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