सीधी में वनरक्षक भर्ती में चौंकाने वाला घटनाक्रम,8 पदों के लिए पहुंची केवल एक अभ्यर्थी।
बैगा,भारिया और सहरिया जनजाति के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया में 7 पद रहे रिक्त,सूचना प्रसार और भागीदारी पर उठे सवाल।
सीधी,ग्रामीण खबर MP।
जिले में आयोजित वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने भर्ती व्यवस्था, सूचना प्रसार और जनजातीय समुदायों तक रोजगार संबंधी अवसरों की पहुंच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बैगा, भारिया और सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए निकाली गई वनरक्षक भर्ती में कुल 8 पदों के विरुद्ध चयन प्रक्रिया के लिए बुलाए गए अभ्यर्थियों में से केवल एक महिला अभ्यर्थी ही उपस्थित हुई, जबकि शेष पद रिक्त रह गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा वर्ष 2026 की विशेष भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत वन मंडल सीधी में बैगा, भारिया एवं सहरिया समुदाय के अभ्यर्थियों के लिए 8 पदों पर भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया था। इनमें सामान्य श्रेणी, भूतपूर्व सैनिक तथा होमगार्ड स्वयंसेवक वर्ग के लिए भी निर्धारित पद शामिल थे। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पात्र अभ्यर्थियों का चयन कर उन्हें दस्तावेज सत्यापन, शारीरिक मापदंड परीक्षण तथा पैदल चाल परीक्षा के लिए आमंत्रित किया गया था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कुल 25 पात्र अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में सम्मिलित होने के लिए कॉल लेटर जारी किए गए थे। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमानुसार संपन्न कराने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मध्यप्रदेश के निर्देशानुसार अधिकारियों की एक समिति भी गठित की गई थी। समिति की उपस्थिति में निर्धारित तिथि पर अभिलेख परीक्षण और शारीरिक परीक्षण की कार्यवाही प्रारंभ की गई।
बताया जाता है कि निर्धारित तिथि पर केवल एक महिला अभ्यर्थी ही उपस्थित हुई, जो सीधी जिले की निवासी न होकर उमरिया जिले से आई थी। इसके बाद अगले दिन पुरुष अभ्यर्थियों के लिए आयोजित पैदल चाल परीक्षा में कोई भी अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुआ। परिणामस्वरूप 8 में से केवल एक अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया में शामिल हो सकी और शेष 7 पद रिक्त रह गए।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर पात्र अभ्यर्थियों के चयन प्रक्रिया में नहीं पहुंचने के पीछे क्या कारण रहे। कई लोगों का मानना है कि दूरस्थ वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं तक भर्ती संबंधी जानकारी प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाती, जिससे वे आवेदन अथवा चयन प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह जाते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बैगा, भारिया और सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर विशेष भर्ती अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन यदि इन समुदायों तक पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं पहुंचेगा तो ऐसी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकेगा। उनका सुझाव है कि भविष्य में भर्ती संबंधी सूचनाओं का प्रचार ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों, स्थानीय विद्यालयों, छात्रावासों, सामुदायिक भवनों तथा जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर किया जाए।
हालांकि कुछ लोगों द्वारा भर्ती प्रक्रिया को लेकर विभिन्न प्रकार की आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं, लेकिन इन दावों के समर्थन में अभी तक कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शासन द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की गई है।
फिलहाल वनरक्षक भर्ती के 7 पद रिक्त रह जाने से यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने वन विभाग से मांग की है कि रिक्त पदों के लिए पुनः भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जाए तथा विशेष जनजातीय समुदायों तक सूचना पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि पात्र युवाओं को रोजगार के अवसरों का लाभ मिल सके और रिक्त पदों को शीघ्र भरा जा सके।

