37 दिन बाद फिर लौटा हाथियों का दल,6 लोगों की मौत की याद से सहमे अनूपपुर के ग्रामीण।
छत्तीसगढ़ सीमा से जैतहरी वन क्षेत्र में दाखिल हुए चार हाथी,वन विभाग ने जारी किया अलर्ट,प्रभावित गांवों में मुनादी कर लोगों को बरतने को कहा गया विशेष सतर्कता।
अनूपपुर,ग्रामीण खबर MP।
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में एक बार फिर हाथियों की दस्तक ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। लगभग 37 दिनों बाद चार हाथियों का दल छत्तीसगढ़ की वन सीमा पार कर पुनः अनूपपुर जिले के जैतहरी वन परिक्षेत्र में पहुंच गया है। बीते महीनों में इसी हाथी दल के कारण हुई छह लोगों की मौत की घटनाएं अभी भी लोगों के जेहन में ताजा हैं, ऐसे में हाथियों की वापसी से सीमावर्ती गांवों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है।
जानकारी के अनुसार बुधवार रात हाथियों का समूह छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल की सिवनी बीट से होते हुए चोलना गांव के रास्ते मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश कर गया। रातभर हाथियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में विचरण किया और गुरुवार सुबह वे धनगवां के जंगल में विश्राम करते हुए पाए गए। हाथियों की गतिविधियों की सूचना मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया और प्रभावित गांवों में सतर्कता अभियान शुरू कर दिया गया।
वन विभाग द्वारा वाहन के माध्यम से गांव-गांव मुनादी कराई जा रही है। ग्रामीणों से जंगलों की ओर नहीं जाने, रात के समय अतिरिक्त सावधानी बरतने, जंगल से लगे कच्चे मकानों में नहीं सोने तथा हाथियों के निकट जाने से बचने की अपील की जा रही है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि हाथियों को देखने के लिए भीड़ लगाने या उनके पीछे जाने जैसी गतिविधियां जानलेवा साबित हो सकती हैं।
वन परिक्षेत्राधिकारी विवेक मिश्रा ने बताया कि यह वही हाथी दल है जिसने कुछ माह पूर्व धनगवां के जंगलों में चार माह से अधिक समय तक डेरा जमाए रखा था। उस दौरान एक पांचवां आक्रामक हाथी भी इस समूह में शामिल हो गया था, जिसके कारण कई गंभीर घटनाएं सामने आई थीं। हाथियों की मौजूदगी से फसलों, मकानों और मानव जीवन को व्यापक नुकसान पहुंचा था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जैसे ही हाथियों के अनूपपुर वन सीमा में प्रवेश करने की जानकारी मिली, उन्हें वापस छत्तीसगढ़ की ओर मोड़ने का प्रयास किया गया। हाथियों को चोलना क्षेत्र से कुकुरगोरा की दिशा में ले जाया गया तथा वे राष्ट्रीय राजमार्ग मार्ग से गुजरनाला की ओर लगभग दो किलोमीटर तक भी बढ़े। हालांकि कुछ समय बाद हाथियों ने दिशा बदल दी और पुनः धनगवां के जंगलों की ओर लौट गए। इससे वन विभाग की चिंता और बढ़ गई है।
गौरतलब है कि यह हाथी दल पिछले तीन वर्षों से लगातार जैतहरी वन क्षेत्र और आसपास के जंगलों में आता-जाता रहा है। हर वर्ष हाथियों का यह समूह कई महीनों तक क्षेत्र में निवास करता है। इस वर्ष भी हाथियों ने धनगवां, अनूपपुर, राजेंद्रग्राम, अहिरगवां, शहडोल जिले के बुढार क्षेत्र तथा डिंडोरी जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में चार माह से अधिक समय तक विचरण किया था।
पिछले पांच महीनों के दौरान हाथियों के हमलों ने कई परिवारों को गहरा दुख दिया। विशेष रूप से समूह में शामिल एक आक्रामक हाथी के कारण छह लोगों की जान चली गई थी। लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने विशेष अभियान चलाकर बांधवगढ़ से प्रशिक्षित हाथियों का दल बुलाया था। लंबे प्रयासों के बाद उस आक्रामक हाथी का सफल रेस्क्यू किया गया, जबकि शेष चार हाथी मरवाही के जंगलों के रास्ते छत्तीसगढ़ लौट गए थे।
अब एक बार फिर उन्हीं हाथियों की वापसी ने प्रशासन और ग्रामीणों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाथियों का दल लंबे समय तक क्षेत्र में रुका तो मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति फिर से पैदा हो सकती है। वहीं वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और हाथियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही न करें, बच्चों को अकेले जंगल की ओर न जाने दें, रात के समय समूह में रहें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि या हाथियों की लोकेशन की जानकारी तुरंत वन अमले को दें। विभाग का कहना है कि सतर्कता और सहयोग से ही किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सकता है।
फिलहाल धनगवां और आसपास के जंगलों में हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीणों की नजरें अब वन विभाग की रणनीति पर टिकी हैं, जबकि पूरे क्षेत्र में हाथियों की वापसी चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

