कटनी की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल:महिला की शिकायत के बावजूद कोतवाली में नहीं दर्ज हुई रिपोर्ट,एसपी कार्यालय तक पहुंचा मामला।
माधवनगर थाना टीआई पर अभद्रता,मारपीट और गाली-गलौज के आरोप;17 तारीख से न्याय के लिए भटक रही महिला,शपथ पत्र सहित शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
कटनी शहर में पुलिस व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार संवेदनशील पुलिसिंग, त्वरित कार्रवाई और आम जनता को न्याय दिलाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आ रही घटनाएं इन दावों की सच्चाई पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। ताजा मामला एक ऐसी महिला से जुड़ा हुआ है, जो पिछले कई दिनों से अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन अब तक उसकी सुनवाई नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार महिला ने माधवनगर थाना प्रभारी संजय तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि मुड़वारा स्टेशन के सामने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, साथ ही मां-बहन की गालियां देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। महिला का आरोप है कि घटना के बाद उसने न्याय की उम्मीद में पुलिस से संपर्क किया, लेकिन उसे हर जगह केवल आश्वासन ही मिले।
पीड़िता के अनुसार वह 17 तारीख से लगातार कोतवाली थाने के चक्कर लगा रही है। हर बार उसे यह कहकर टाल दिया जाता है कि मामले की जांच की जा रही है या वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद कार्रवाई होगी। महिला का कहना है कि उसने अपनी शिकायत विस्तार से लिखित रूप में दी, घटना से जुड़े तथ्यों को बताया और यहां तक कि शपथ पत्र के साथ आवेदन प्रस्तुत किया, ताकि उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाए। इसके बावजूद आज तक उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
महिला ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई है। सूत्रों के अनुसार एसपी कार्यालय तक मामला पहुंचने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। पीड़िता का आरोप है कि उसे केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन न्याय दिलाने के नाम पर कोई वास्तविक कदम नहीं उठाया जा रहा। यही कारण है कि अब यह मामला केवल एक शिकायत तक सीमित न रहकर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन चुका है।
शहर में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि एक महिला, जो स्वयं पुलिस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगा रही है, उसकी शिकायत तक दर्ज नहीं हो पा रही है, तो आम जनता किस भरोसे न्याय की उम्मीद करे। लोगों का कहना है कि पुलिस का काम निष्पक्ष जांच करना है, लेकिन शिकायत दर्ज किए बिना ही मामले को दबाने की कोशिश जैसी स्थिति दिखाई देना बेहद चिंताजनक है।
कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग उठानी शुरू कर दी है। नागरिकों का कहना है कि यदि महिला के आरोप गलत हैं तो निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए, लेकिन यदि आरोप सही हैं तो संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्रवाई होना आवश्यक है। लोगों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस पर जनता का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण होता है और ऐसे मामलों से वही भरोसा कमजोर होता दिखाई देता है।
शहर के वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि पहले भी कई मामलों में शिकायतकर्ताओं को लंबी प्रक्रिया और प्रशासनिक उदासीनता का सामना करना पड़ा है। उनका कहना है कि जब एक महिला लगातार कई दिनों तक थानों और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाए, तो यह केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
इस घटना ने पुलिस प्रशासन की जवाबदेही पर भी बहस छेड़ दी है। आमतौर पर पुलिस विभाग द्वारा महिला सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, महिला हेल्पलाइन और त्वरित कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब एक महिला स्वयं न्याय के लिए भटकती दिखाई दे, तो इन दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी यह मामला चर्चा का विषय बनता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि शिकायत किसी सामान्य व्यक्ति के खिलाफ होती तो संभवतः तत्काल कार्रवाई हो जाती, लेकिन जब आरोप किसी थाना प्रभारी स्तर के अधिकारी पर हों तो मामला दबता हुआ दिखाई देता है। यही धारणा लोगों के मन में व्यवस्था को लेकर अविश्वास पैदा करती है।
महिला का कहना है कि वह न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी। उसका कहना है कि वह केवल अपनी शिकायत दर्ज कराना चाहती है ताकि निष्पक्ष जांच हो सके और सच्चाई सामने आ सके। पीड़िता का यह भी कहना है कि यदि उसकी बात नहीं सुनी गई तो वह उच्च स्तर तक शिकायत लेकर जाएगी।
फिलहाल पूरा मामला शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या पीड़ित महिला की शिकायत दर्ज होगी? क्या मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? क्या आरोपों की सत्यता सामने लाने के लिए स्वतंत्र कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी केवल फाइलों और आश्वासनों के बीच दबकर रह जाएगा।
अब निगाहें पुलिस प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। शहर की जनता यह देखना चाहती है कि कानून व्यवस्था और न्याय की बात करने वाली व्यवस्था इस मामले में कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता दिखाती है। क्योंकि यह मामला केवल एक महिला की शिकायत का नहीं, बल्कि जनता के पुलिस व्यवस्था पर भरोसे का भी बन चुका है।

