कटनी में बिल देने से इनकार पर बवाल,उपभोक्ता ने की शिकायत,जीएसटी और उपभोक्ता कानून की खुली अनदेखी।
खरीदारी के बाद रसीद न देने पर दुकानदार के खिलाफ हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत,जांच और सख्त कार्रवाई की मांग।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
जिले में उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी का एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर बाजार व्यवस्था और कर अनुपालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक स्थानीय दुकानदार द्वारा ग्राहक को सामान बेचने के बाद बिल या रसीद देने से साफ इनकार कर दिया गया, जिससे नाराज होकर उपभोक्ता ने संबंधित हेल्पलाइन पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और बाजार में चल रही अनियमितताओं को उजागर कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय निवासी गजेन्द्र तिवारी द्वारा शिकायत क्रमांक 37620126 (दिनांक 05 अप्रैल 2026) के तहत यह मामला दर्ज कराया गया है। शिकायत में उन्होंने विस्तार से बताया कि उन्होंने कटनी जिले की एक दुकान से आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी की। खरीदारी के बाद जब उन्होंने दुकानदार से बिल या रसीद मांगी, तो दुकानदार ने सीधे तौर पर इनकार कर दिया।
गजेन्द्र तिवारी का आरोप है कि जब उन्होंने बार-बार बिल देने की मांग की, तो दुकानदार ने लापरवाही भरे अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि “यहां किसी को बिल की जरूरत नहीं होती, सामान दिया जा रहा है, वही काफी है।” इस तरह का जवाब न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह कानून के प्रति खुली अवहेलना को भी दर्शाता है।
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि बिल न देने की यह प्रवृत्ति उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बिना बिल के उपभोक्ता के पास खरीद का कोई वैध प्रमाण नहीं होता, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की खराबी, एक्सचेंज, वारंटी या कानूनी विवाद की स्थिति में उसे गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि व्यापक स्तर पर कर प्रणाली को भी प्रभावित करती हैं। बिल जारी न करना अक्सर कर चोरी से जुड़ा होता है, जिससे सरकार को राजस्व की हानि होती है और ईमानदार व्यापारियों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनती है।
कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो जीएसटी कानून के तहत प्रत्येक पंजीकृत व्यापारी के लिए यह अनिवार्य है कि वह हर टैक्स योग्य बिक्री पर उपभोक्ता को वैध टैक्स इनवॉइस जारी करे। ऐसा न करने पर संबंधित व्यापारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। नियमों के अनुसार, बिल जारी न करने पर न्यूनतम 10 हजार रुपये या देय कर राशि के बराबर (जो भी अधिक हो) जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि जांच में कर चोरी की मंशा या सुनियोजित अनियमितता सामने आती है, तो दंडात्मक कार्रवाई और भी सख्त हो सकती है, जिसमें भारी आर्थिक दंड के साथ कानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत भी इस प्रकार की गतिविधि को ‘अनुचित व्यापार प्रथा’ माना गया है। यह अधिनियम उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सशक्त बनाता है और ऐसे मामलों में संबंधित व्यापारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कर उचित कार्रवाई की जा सकती है।
गजेन्द्र तिवारी ने अपनी शिकायत में प्रशासन से कई महत्वपूर्ण मांगें की हैं। उन्होंने आग्रह किया है कि संबंधित दुकानदार के खिलाफ तत्काल जांच शुरू की जाए, उसे नियमों के तहत बिल जारी करने के लिए बाध्य किया जाए और जीएसटी तथा उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के अंतर्गत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि उन्हें शिकायत की प्रगति के बारे में नियमित रूप से सूचित किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले की जानकारी वाणिज्यिक कर विभाग को पहले भी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इस कारण उपभोक्ता वर्ग में असंतोष व्याप्त है और प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे बाजार तंत्र में व्याप्त एक बड़ी समस्या की ओर संकेत करती है। कई स्थानों पर आज भी बिना बिल के सामान बेचे जाने की प्रवृत्ति जारी है, जो न केवल गैरकानूनी है, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ भी है।
विशेषज्ञों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए उपभोक्ताओं को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। हर खरीदारी पर बिल लेना और न मिलने की स्थिति में शिकायत दर्ज कराना जरूरी है। इससे न केवल व्यक्तिगत अधिकार सुरक्षित रहते हैं, बल्कि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।
जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से अब यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करें और दोषी के खिलाफ सख्त कदम उठाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके और उपभोक्ताओं का विश्वास बाजार व्यवस्था में बना रहे।
