उमरिया पान में स्वच्छता अभियान की खुली पोल,गंदगी और अव्यवस्था से जूझ रहे ग्रामीण व यात्री।

 उमरिया पान में स्वच्छता अभियान की खुली पोल,गंदगी और अव्यवस्था से जूझ रहे ग्रामीण व यात्री।

न्यू बस स्टैंड पर बदहाल शौचालय और गंदे हैंडपंप से परेशान लोग,वार्ड मेम्बर की शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई,सचिव पर मनमानी के आरोप।

उमरिया पान,ग्रामीण खबर MP।

कटनी जिले की ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत उमरिया पान में स्वच्छता व्यवस्था की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत पूरी तरह विपरीत नजर आ रही है। गांव के प्रमुख स्थल न्यू बस स्टैंड पर फैली गंदगी और अव्यवस्था ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि यहां आने-जाने वाले सैकड़ों यात्रियों और स्थानीय नागरिकों के लिए गंभीर परेशानी खड़ी कर दी है।

न्यू बस स्टैंड, जो कि गांव का मुख्य यातायात केंद्र है, वहां बुनियादी सुविधाएं होते हुए भी उनका उपयोग करना लोगों के लिए मुश्किल बन गया है। बस स्टैंड परिसर में बने शौचालय और बाथरूम अपनी बदहाल स्थिति के कारण उपयोग के लायक नहीं रह गए हैं। चारों ओर फैली गंदगी, बदबू और सफाई के अभाव के चलते लोग इनका उपयोग करने से बच रहे हैं। इससे विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब पेयजल व्यवस्था की बात सामने आती है। बस स्टैंड परिसर में लगा हैंडपंप भी गंदगी से घिरा हुआ है। हैंडपंप के आसपास कीचड़, कचरा और गंदा पानी जमा रहने के कारण लोग उसका पानी पीने से कतरा रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वहीं यात्रियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। कई बार यात्रियों को मजबूरी में निजी दुकानों या दूर-दराज के स्थानों पर जाना पड़ता है, जिससे उनकी यात्रा और भी कठिन हो जाती है।

बस स्टैंड के बीचों-बीच बह रही नाली का गंदा पानी पूरे परिसर की स्थिति को और बदतर बना रहा है। यह न केवल बदबू फैलाता है, बल्कि बीमारियों के फैलने का भी खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब यह गंदा पानी पूरे क्षेत्र में फैल जाता है।

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय वार्ड मेम्बर जगमोहन चौरसिया ने कई बार संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बार-बार पंचायत स्तर पर इस समस्या को उठाया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उनका आरोप है कि पंचायत सचिव से जब भी इस विषय पर बात की जाती है, तो उन्हें सीधे जवाब देने के बजाय सरपंच के पुत्र से संपर्क करने के लिए कहा जाता है।

यह बात ग्रामीणों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार अधिकारी होने के बावजूद सचिव द्वारा किसी अन्य व्यक्ति की ओर भेजना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है। वार्ड मेम्बर का स्पष्ट कहना है कि सरपंच का पुत्र कोई अधिकृत पदाधिकारी नहीं है, फिर भी उसकी भूमिका सामने आना संदेह पैदा करता है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब से राजकुमार पटेल को ग्राम पंचायत का प्रभारी सचिव बनाया गया है, तब से पंचायत में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी, सफाई व्यवस्था की अनदेखी और जनहित के मुद्दों पर उदासीनता जैसे आरोप सामने आ रहे हैं।

गांव के जागरूक नागरिकों ने अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सूचना के अधिकार के तहत पंचायत द्वारा किए गए कार्यों और खर्चों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है, तो वे इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाएंगे और जनहित याचिका दायर करेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ग्रामीणों और यात्रियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी साफ देखी जा रही है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ तभी संभव है, जब स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाएं। केवल कागजों में योजनाएं चलाने से जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आता।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उमरिया पान की स्वच्छता व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित सरपंच और सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का मानना है कि समय रहते यदि सुधार नहीं किया गया तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

अंततः यह मामला केवल एक गांव की स्वच्छता का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और जनहित से जुड़े मूलभूत अधिकारों का है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में उमरिया पान के लोगों को स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण मिल पाता है या नहीं।

ग्रामीण खबर MP-
जनमानस की निष्पक्ष आवाज
तहसील रिपोर्टर:जगमोहन चौरसिया।

Post a Comment

Previous Post Next Post