हरदी गांव में कलेक्टर ने खुद बंद किया बहता नल,दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश।

 हरदी गांव में कलेक्टर ने खुद बंद किया बहता नल,दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश।

ढीमरखेड़ा क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर आशीष तिवारी का संवेदनशील कदम,“परिवर्तन की शुरुआत खुद से” का दिया उदाहरण।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

 प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच कभी-कभी ऐसे प्रेरणादायक दृश्य सामने आते हैं, जो न केवल व्यवस्था की सक्रियता को दर्शाते हैं, बल्कि समाज को नई सोच और दिशा भी देते हैं। ऐसा ही एक सशक्त और संदेशपूर्ण उदाहरण बुधवार को ढीमरखेड़ा क्षेत्र के हरदी गांव में देखने को मिला, जब कलेक्टर आशीष तिवारी ने जल संरक्षण का महत्व केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार से प्रस्तुत किया।

जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही शासकीय योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री तिवारी हरदी गांव पहुंचे थे। उन्होंने ‘नल-जल योजना’ के अंतर्गत हो रही जल आपूर्ति की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण करने का निर्णय लिया। इसके लिए वे किसी औपचारिकता तक सीमित न रहकर स्वयं गांव की गलियों में पैदल निकले और घर-घर जाकर लोगों से संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे सवाल किए कि उन्हें पानी समय पर मिल रहा है या नहीं, आपूर्ति नियमित है या नहीं, और कहीं कोई समस्या तो नहीं है।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री तिवारी का ध्यान सड़क किनारे लगे एक ऐसे नल की ओर गया, जिससे पानी लगातार बह रहा था। यह दृश्य सामान्य होते हुए भी बेहद गंभीर था, क्योंकि पानी की हर बूंद कीमती है और इस तरह की लापरवाही भविष्य में जल संकट को और गहरा सकती है। इस स्थिति को देखते ही कलेक्टर वहीं रुक गए और उन्होंने इसे केवल एक छोटी सी गलती मानकर अनदेखा नहीं किया।

उन्होंने आसपास मौजूद ग्रामीणों को बुलाकर शांत और सरल शब्दों में समझाया कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जिस तरह जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, उसे देखते हुए पानी की बर्बादी एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे पानी का उपयोग आवश्यकता के अनुसार करें और अनावश्यक रूप से बहने न दें।

इसके बाद कलेक्टर श्री तिवारी स्वयं उस नल के पास पहुंचे। उन्होंने पहले उसी बहते पानी से अपनी प्यास बुझाई और फिर नल की टोंटी को ठीक करते हुए उसे कसकर बंद कर दिया। यह दृश्य वहां मौजूद ग्रामीणों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बन गया। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इस प्रकार स्वयं आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाना लोगों के लिए एक बड़ा संदेश था कि बदलाव किसी आदेश से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पहल से शुरू होता है।

कलेक्टर के इस व्यवहार ने ग्रामीणों के मन पर गहरा प्रभाव डाला। लोगों ने उनके इस कदम की सराहना की और यह महसूस किया कि प्रशासन केवल नियमों और आदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार भी है। कई ग्रामीणों ने कहा कि इस घटना के बाद वे स्वयं भी पानी के प्रति अधिक जागरूक रहेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं, जब आमजन उनमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ‘नल-जल योजना’ का उद्देश्य केवल पानी पहुंचाना नहीं, बल्कि जल के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। यदि लोग स्वयं जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तो किसी भी योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देशित किया कि वे गांवों में नियमित रूप से निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी पानी की बर्बादी न हो। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि कहीं भी पानी व्यर्थ बहता दिखाई दे, तो उसे तुरंत बंद करें या संबंधित विभाग को सूचना दें।

हरदी गांव में घटित यह घटना एक साधारण निरीक्षण से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बन गई। यह केवल एक नल बंद करने की घटना नहीं थी, बल्कि एक सोच, एक जिम्मेदारी और एक संदेश का प्रतीक थी। इसने यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक पद पर बैठा व्यक्ति यदि संवेदनशील हो, तो वह अपने छोटे-छोटे कार्यों से भी समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

आज जब देश के कई हिस्सों में जल संकट एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रहा है, ऐसे में इस तरह के उदाहरण समाज के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं। यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर पानी की बचत का संकल्प ले और छोटी-छोटी लापरवाहियों को नजरअंदाज न करे, तो आने वाले समय में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हरदी गांव में कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा किया गया यह छोटा सा कार्य एक बड़े संदेश के रूप में सामने आया है, जो यह सिखाता है कि जिम्मेदारी केवल पद की नहीं होती, बल्कि सोच और व्यवहार की भी होती है। यह घटना निश्चित रूप से जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करेगी।

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