जैसलमेर प्रकरण पर उबाल,जयपुर में 8वें दिन भी पत्रकारों का धरना जारी,सरकार पर हठधर्मिता का आरोप।
रेस्टोरेंट सीज और ध्वस्तीकरण को बताया प्रतिशोधात्मक कार्रवाई,कलेक्टर पर सख्त कार्रवाई व मुआवजे की मांग,दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठाने की तैयारी।
जयपुर,ग्रामीण खबर MP।
जयपुर में जैसलमेर प्रकरण को लेकर पत्रकारों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। आईएफडब्ल्यूजे के बैनर तले जारी धरना प्रदर्शन रविवार को 8वें दिन भी जारी रहा। पत्रकारों ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रशासनिक निरंकुशता करार देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
धरना स्थल पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि संगठन पहले दिन से ही सरकार के साथ सकारात्मक वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वयं इस आंदोलन को समाप्त नहीं करना चाहती, जिससे पत्रकारों में आक्रोश और बढ़ता जा रहा है।
राठौड़ ने कहा कि जैसलमेर के कलेक्टर का तबादला तो कर दिया गया, लेकिन उनके खिलाफ की गई कथित अनियमितताओं पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा उन्हें वित्त विभाग में महत्वपूर्ण पद देकर सरकार ने अपनी ही “जीरो टॉलरेंस” नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस अधिकारी के खिलाफ पत्रकारों, आमजन और पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश है, उसमें ऐसी कौन-सी विशेषता है जो सरकार को ही दिखाई दे रही है।
उन्होंने बताया कि वे वर्ष 2004 से जैसलमेर स्थित डेजर्ट क्लब में विधिवत अनुमति के साथ ‘स्वाद रेस्टोरेंट’ का संचालन कर रहे थे और दिसंबर 2025 तक का किराया अग्रिम जमा था। इसके बावजूद कलेक्टर द्वारा कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर रेस्टोरेंट को सीज कर ध्वस्त कर दिया गया। इसे उन्होंने प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हुए कहा कि एक पत्रकार की आजीविका खत्म कर मानसिक और आर्थिक दबाव बनाने का प्रयास किया गया है।
राठौड़ ने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमविरुद्ध भू-आवंटन किए थे। जब इन मामलों को उजागर किया गया तो उसके बदले में यह कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से उन्हें एक करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
इसी के विरोध में प्रदेशभर के पत्रकार 29 मार्च से जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दे रहे हैं। प्रमुख मांगों में संबंधित अधिकारी का निलंबन, नुकसान की भरपाई और निष्पक्ष जांच शामिल है।
संगठन ने आंदोलन को और तेज करने के संकेत देते हुए बताया कि 5 और 6 अप्रैल को उपेंद्र सिंह राठौड़ दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय बैठक में शामिल होंगे, जहां देशभर के पदाधिकारियों के साथ इस मुद्दे को प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया जाएगा।
धरने को निरंतर जारी रखने के लिए संगठन ने अलग-अलग जिलों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसी क्रम में सातवें और आठवें दिन की जिम्मेदारी सिरोही जिले को दी गई है, जिसका नेतृत्व जोधपुर संभाग प्रभारी विक्रम सिंह करणोत कर रहे हैं। धरना स्थल पर रविवार को भी बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि जब तक न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर इसे राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
