खितौला जैन मंदिर में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया।

 खितौला जैन मंदिर में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया।

भव्य शोभायात्रा,मस्तकाभिषेक और पूजन के साथ गूंजे जयकारे,बड़ी संख्या में शामिल हुए जैन समाज के श्रद्धालु।

सिहोरा,ग्रामीण खबर MP।

खितौला स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में गुरुवार को चैत्र कृष्ण नवमी के पावन अवसर पर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव भगवान 1008 आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों, पूजन-अर्चना और भगवान की आराधना का क्रम प्रारंभ हो गया था। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भगवान आदिनाथ की भक्ति में लीन नजर आए।

प्रातः काल से ही जैन समाज के श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे थे। मंदिर में भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया तथा वेदी को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। भगवान के जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं द्वारा पूजन-अर्चना कर भगवान से सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की गई। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और मंगल ध्वनियों से वातावरण पूरी तरह धर्ममय हो गया।

प्रातः लगभग 7 बजे मंदिर से भगवान श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में भगवान आदिनाथ की सुसज्जित पालकी को श्रद्धालुओं ने कंधों पर उठाकर नगर के विभिन्न मार्गों से भ्रमण कराया। शोभायात्रा में जैन समाज के महिला-पुरुष, युवक-युवतियों तथा बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्रद्धालु भगवान आदिनाथ के जयकारे लगाते हुए भक्ति भाव से शोभायात्रा के साथ चल रहे थे।

शोभायात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर पहुंची। शोभायात्रा के दौरान मार्ग में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारी और पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। गाजे-बाजे और भक्ति संगीत के साथ निकली शोभायात्रा ने पूरे नगर को भक्तिमय बना दिया। नगरवासियों ने भी श्रद्धा भाव के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया और भगवान आदिनाथ के दर्शन कर धर्म लाभ प्राप्त किया।

शोभायात्रा में जैन समाज की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में सहभागिता की। महिलाओं ने पुष्पवाटिका और दिव्य घोष के साथ पूरे मार्ग में भक्ति भाव से शोभायात्रा की शोभा बढ़ाई। महिलाओं द्वारा भगवान के जयकारों और मंगल गीतों से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के जीवन और उनके द्वारा दिए गए धर्म, त्याग, अहिंसा और करुणा के संदेश को स्मरण करते हुए भक्ति भाव से सहभागिता की।

नगर में निकली इस भव्य शोभायात्रा को देखने के लिए मार्ग में जगह-जगह नागरिकों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने अपने घरों और दुकानों के सामने खड़े होकर भगवान के दर्शन किए और पुष्प अर्पित किए। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवमय बना रहा।

शोभायात्रा के नगर भ्रमण के पश्चात मंदिर परिसर में भगवान का मस्तकाभिषेक, शांतिधारा और पूजन विधि-विधान से संपन्न कराया गया। भक्तों ने भगवान की प्रतिमा का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक कर श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। इसके बाद शांतिधारा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और समाज के कल्याण की कामना की।

मंदिर की ऊपरी वेदी में विराजमान मूलनायक भगवान 1008 आदिनाथ का भी श्रद्धापूर्वक मस्तकाभिषेक किया गया। इस दौरान मंदिर में मंगल ध्वनि और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही। श्रद्धालुओं ने भगवान की आराधना कर धर्म लाभ प्राप्त किया तथा परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना की।

आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में पूरे समय भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर भगवान आदिनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते रहे। मंदिर समिति और जैन समाज के सदस्यों द्वारा आयोजन को सफल बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, जिससे कार्यक्रम सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका।

कार्यक्रम में जैन समाज के अनेक गणमान्यजन, समाजसेवी, वरिष्ठ नागरिक, महिला मंडल की सदस्याएं, युवक-युवतियां तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक को श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया।

जैन समाज के लोगों ने इस अवसर पर भगवान आदिनाथ के आदर्शों को स्मरण करते हुए समाज में अहिंसा, सत्य, संयम और करुणा के संदेश को अपनाने का संकल्प लिया। भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक जैन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दिन श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ प्राप्त करते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि भगवान आदिनाथ ने मानव समाज को धर्म, संयम और तप का मार्ग दिखाया। उनके बताए हुए सिद्धांत आज भी मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक हैं। उनके आदर्शों का अनुसरण कर समाज में शांति, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है।

दिन भर चले धार्मिक आयोजनों के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों का आवागमन बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया और जन्म कल्याणक के इस पावन अवसर को पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया। पूरे आयोजन के दौरान खितौला और आसपास का क्षेत्र धार्मिक आस्था और श्रद्धा से सराबोर नजर आया।

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