निरंतरता और अनुशासन से ही व्यक्ति व संगठन महान बनते हैं :विवेकानंद पटेल।
बी डी हाई स्कूल केशव बस्ती में भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न,स्वबोध,संस्कार और पारिवारिक एकता पर वक्ताओं ने रखे सारगर्भित विचार।
सिहोरा,ग्रामीण खबर MP।
बी डी हाई स्कूल केशव बस्ती परिसर में आयोजित हिंदू सम्मेलन रविवार को वैचारिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का केंद्र बना रहा। सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग सह कार्यवाह विवेकानंद पटेल ने मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी कार्य को करने की निरंतरता और अनुशासन ही व्यक्ति तथा संगठन को महान बनाता है। उन्होंने कहा कि केवल विचार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन विचारों को नियमित आचरण में उतारना ही सफलता की कुंजी है।
विवेकानंद पटेल ने अपने उद्बोधन में वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज समाज को स्वबोध की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें अपने जीवन में स्वदेशी, स्व आचरण, स्व भूषा, स्व भोजन और स्व भाषा को प्राथमिकता देनी चाहिए। जब व्यक्ति अपने मूल संस्कारों और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ता है, तभी समाज सशक्त होता है और राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है।
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है और यदि युवा अपनी संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर कार्य करें, तो भारत को विश्व पटल पर पुनः गौरवशाली स्थान प्राप्त होने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने संगठनात्मक अनुशासन, सेवा भावना और समर्पण को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आकर्षण जी महाराज ने अपने प्रेरक उद्बोधन में संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार देना भी अत्यंत आवश्यक है। संस्कारवान संतान ही आगे चलकर समाज और देश के विकास में सशक्त भागीदार बनती है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार, समाज और विद्यालय मिलकर बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास करें, तो राष्ट्र की उन्नति स्वतः सुनिश्चित हो जाती है।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि मातृशक्ति साधना जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता ने पारिवारिक एकता और आपसी संवाद पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में परिवार के सदस्य एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से दूर होते जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक परिवार को सप्ताह में कम से कम एक बार सभी सदस्यों के साथ बैठकर भोजन करना चाहिए। इस दौरान आपसी विचारों, समस्याओं और अनुभवों का आदान-प्रदान करने से परिवार में आपसी समझ और एकता मजबूत होती है, जो समाज की मजबूती का आधार है।
सम्मेलन के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। देशभक्ति, संस्कृति और भारतीय परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया और कार्यक्रम की भव्यता में चार चांद लगा दिए। बच्चों की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि आने वाली पीढ़ी संस्कारों से जुड़कर आगे बढ़ रही है।
कार्यक्रम के अंत में भारत माता की आरती की गई, जिसके पश्चात उपस्थित जनसमूह में प्रसाद का वितरण किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में समाजजन, मातृशक्ति, युवा एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे समाज को दिशा देने वाला आयोजन बताया।
हिंदू सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रभक्ति के संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया गया, जिससे क्षेत्र में सकारात्मक वातावरण का निर्माण हुआ।





