चांद का मालिक बनने का दावा कर रातों-रात चर्चा में आया बेरोजगार शख्स।
61.1 करोड़ एकड़ जमीन बेचने का दावा,19.95 डॉलर प्रति एकड़ तक में बेचे कागजात,विशेषज्ञों के मुताबिक कानूनी तौर पर चांद की जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलता।
धरती पर जमीन खरीदना और बेचना आम बात है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति चांद की जमीन बेचने लगे तो यह बात निश्चित रूप से हैरान करने वाली है। अमेरिका के डेनिस होप ने कुछ ऐसा ही दावा कर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बेरोजगारी के दौर में प्रॉपर्टी से कमाई का रास्ता तलाश रहे होप ने चांद पर अपना मालिकाना हक होने का दावा किया और बाद में चांद की जमीन के कथित प्लॉट बेचने का कारोबार शुरू कर दिया।
डेनिस होप ने 1980 के आसपास चांद पर अपना दावा जताया और इसके बाद Lunar Embassy नाम से एक कारोबार शुरू किया। उन्होंने चांद की सतह को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर लोगों को जमीन के कागजात और प्रमाणपत्र बेचने शुरू किए। उनका तर्क था कि 1967 की संयुक्त राष्ट्र Outer Space Treaty में देशों को चांद और अन्य खगोलीय पिंडों पर अपना मालिकाना हक जताने से रोका गया है, लेकिन निजी व्यक्ति के बारे में उसी तरह स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है।
इसी व्याख्या को आधार बनाकर होप ने दावा किया कि चांद पर निजी स्वामित्व का दावा किया जा सकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को पत्र भेजकर अपने दावे की जानकारी दी और यह भी कहा कि वह चांद की जमीन को अलग-अलग हिस्सों में बेचेंगे। उन्हें संयुक्त राष्ट्र की ओर से ऐसा कोई जवाब नहीं मिला जिसे वह अपने दावे के खिलाफ औपचारिक आपत्ति मानते। होप ने इस स्थिति को अपने पक्ष में माना और अपने कारोबार को आगे बढ़ाया।
इसके बाद चांद की जमीन के नाम पर प्रमाणपत्र बेचने का सिलसिला शुरू हुआ। उनकी ओर से आम लोगों को अपेक्षाकृत कम कीमत में चांद की जमीन के कागजात उपलब्ध कराने का दावा किया गया। पुरानी रिपोर्टों में एक एकड़ जमीन की कीमत करीब 19.95 डॉलर तक बताए जाने का उल्लेख मिलता है। इसके अतिरिक्त शिपिंग और अन्य शुल्क भी लिए जाते थे।
होप के कारोबार की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि चांद की जमीन खरीदने वालों में आम लोगों के साथ कुछ प्रसिद्ध नामों का भी उल्लेख सामने आया। विभिन्न रिपोर्टों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों जिमी कार्टर, रोनाल्ड रीगन और जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश द्वारा उनके यहां से चांद की जमीन के कागजात खरीदने का उल्लेख मिलता है। हालांकि ऐसे कागजात खरीदने का मतलब यह नहीं था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संबंधित व्यक्ति चांद की जमीन का वास्तविक मालिक बन गया।
डेनिस होप ने दावा किया कि वह अब तक 611 मिलियन एकड़ यानी करीब 61.1 करोड़ एकड़ से अधिक चांद की जमीन बेच चुके हैं। इस दावे ने उन्हें दुनिया भर में चर्चित कर दिया। हालांकि यह आंकड़ा मुख्य रूप से होप और उनके कारोबार से जुड़े दावों पर आधारित है, इसे इस अर्थ में नहीं लिया जा सकता कि इतनी जमीन का कानूनी हस्तांतरण हो चुका है।
चांद की जमीन के वास्तविक कानूनी मालिकाना हक का सवाल इससे बिल्कुल अलग है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून के विशेषज्ञों के अनुसार 1967 की Outer Space Treaty का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि कोई देश चांद या किसी अन्य खगोलीय पिंड को अपने राष्ट्रीय क्षेत्र के रूप में दावा न कर सके। इसके अलावा निजी व्यक्तियों और गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों को भी अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे से बाहर नहीं माना जाता।
International Institute of Space Law से जुड़ी विशेषज्ञ तंजा मैसन-ज्वान ने भी इस तरह के निजी दावों को कानूनी स्वामित्व के रूप में स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा चांद की जमीन का प्रमाणपत्र जारी कर देने अथवा कोई व्यक्ति उस प्रमाणपत्र को खरीद लेने से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उस जमीन पर वास्तविक मालिकाना अधिकार पैदा नहीं हो जाता।
यानी डेनिस होप की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून की एक कथित कानूनी खामी की अपनी व्याख्या के आधार पर एक अनोखा कारोबार खड़ा कर दिया। उनके द्वारा बेचे गए कागजात लोगों के लिए चांद से जुड़ी एक अनोखी याद या प्रतीक जरूर बन सकते हैं, लेकिन उन्हें चांद की जमीन का वैध मालिकाना दस्तावेज नहीं माना जाता।
उनके बारे में यह दावा भी लंबे समय से किया जाता रहा है कि चांद की जमीन बेचकर उन्होंने इतनी बड़ी रकम कमाई कि वह अरबपति बन गए। हालांकि उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों में उनके अरबपति बनने की पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए उन्हें निश्चित रूप से अरबपति कहना सही नहीं होगा। इतना जरूर है कि चांद की जमीन बेचने का उनका कारोबार लंबे समय तक चर्चा में रहा और उन्होंने इस अनोखे विचार से अच्छी-खासी कमाई की।
डेनिस होप की कहानी आज भी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने ऐसी संपत्ति बेचने का कारोबार खड़ा किया, जिसे धरती पर बैठकर कोई व्यक्ति वास्तव में अपने कब्जे में नहीं ले सकता। चांद पर जमीन खरीदने वाले लोगों के हाथ में भले ही प्रमाणपत्र आ गया हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून की नजर में वह प्रमाणपत्र चांद की जमीन का वैध मालिकाना हक नहीं देता।
इस तरह डेनिस होप का चांद की जमीन बेचने का किस्सा वास्तविक है, 61.1 करोड़ एकड़ जमीन बेचने का दावा भी उनके कारोबार से जुड़ा हुआ है, लेकिन चांद का कानूनी मालिक बन जाने की बात सही नहीं है। उनकी कहानी को इस रूप में समझना ज्यादा उचित होगा कि एक बेरोजगार अमेरिकी ने चांद की जमीन पर अपना दावा करने की अनोखी व्याख्या की और उसी दावे को आधार बनाकर दुनिया के सबसे अनोखे रियल एस्टेट कारोबारों में से एक खड़ा कर दिया।


