कांग्रेस में वीर भारत न्यास को लेकर बढ़ा सियासी घमासान,दिग्विजय-जीतू के अलग रुख से गरमाई राजनीति।
कमलनाथ के 'लापता' पोस्टर विवाद के बीच भाजपा का कांग्रेस पर हमला,कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के मुद्दों पर किया पलटवार।
भोपाल,ग्रामीण खबर MP।
मध्य प्रदेश की राजनीति में वीर भारत न्यास का मुद्दा नया सियासी विवाद बन गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अलग रुख के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की अंदरूनी कलह करार देते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है, जबकि कांग्रेस ने भाजपा पर वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। इसी बीच छिंदवाड़ा में लगे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के "लापता" पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा दिया है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन वीर भारत न्यास को मात्र एक रुपये के प्रतीकात्मक मूल्य पर उपलब्ध कराई गई। उन्होंने दावा किया कि इस ट्रस्ट से मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी जुड़े हुए हैं और पूरे मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदेश की जनता के सामने जवाब देना चाहिए। पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकारी संपत्तियों के आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरती गई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में आयोजित प्रेस वार्ता में इस विषय पर अलग रुख अपनाते हुए कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार वीर भारत न्यास एक सरकारी न्यास है। उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं है तथा तथ्यों के आधार पर ही राजनीतिक बयान दिए जाने चाहिए। दिग्विजय सिंह के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस के भीतर मतभेद के रूप में देखा जाने लगा।
दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह स्वयं दस वर्षों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और उन्हें सरकारी प्रक्रियाओं तथा अभिलेखों की पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ही अपने प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों से सहमत नहीं हैं, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। भाजपा ने इसे कांग्रेस की आंतरिक असहमति और नेतृत्व संकट का प्रमाण बताया।
रामेश्वर शर्मा ने यह भी कहा कि वीर भारत न्यास एक सरकारी न्यास है और इस संबंध में अनावश्यक भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से बिना तथ्यात्मक आधार के आरोप लगाने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन तथ्यों से परे जाकर आरोप लगाना उचित नहीं है।
वहीं कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और विकास कार्यों से जुड़े कई गंभीर प्रश्न हैं, जिनका जवाब देने के बजाय भाजपा विपक्ष पर हमलावर है। कांग्रेस ने दोहराया कि सार्वजनिक संपत्तियों के आवंटन से जुड़े सभी मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है और यदि कोई संदेह है तो उसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
इसी दौरान छिंदवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर लगाए गए "लापता" पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया। इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कमलनाथ प्रदेश की राजनीति में रहें या न रहें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अपने वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करती है और व्यक्तिगत टिप्पणी की राजनीति में विश्वास नहीं रखती।
कांग्रेस ने कमलनाथ से जुड़े पोस्टरों को राजनीतिक स्टंट बताते हुए कहा कि भाजपा जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार की गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश की जनता विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों से जुड़े मुद्दों पर जवाब चाहती है, न कि पोस्टर राजनीति पर।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीर भारत न्यास का मुद्दा आगामी दिनों में प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है। कांग्रेस के भीतर इस विषय पर सामने आए अलग-अलग बयानों ने विपक्ष को असहज स्थिति में ला दिया है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की कमजोरी के रूप में जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। दूसरी ओर कांग्रेस सरकार से भूमि आवंटन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर लगातार जवाब मांगने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। वीर भारत न्यास को लेकर लगाए गए आरोपों और उनके जवाबों पर दोनों दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। मामले में किसी सक्षम न्यायिक अथवा जांच एजेंसी द्वारा आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विवाद पर प्रदेश की राजनीति और अधिक गरमा सकती है।यदि चाहें तो मैं इसके लिए प्रथम पृष्ठ के अनुरूप आकर्षक लेआउट वाला थंबनेल/बैनर भी तैयार कर सकता हूँ।

