दो से अधिक बच्चों वालों को सरकारी नौकरी से वंचित करने का प्रस्ताव निरस्त,मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा फैसला।

 दो से अधिक बच्चों वालों को सरकारी नौकरी से वंचित करने का प्रस्ताव निरस्त,मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा फैसला।

ड्राफ्ट नियमों से हटेगा दो-बच्चे की सीमा वाला प्रावधान,पोर्टल से प्रारूप हटाने और संशोधित मसौदा जारी करने के निर्देश।

भोपाल,ग्रामीण खबर MP।

मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य के लाखों युवाओं और अभ्यर्थियों को राहत देते हुए उस प्रस्तावित प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत दो से अधिक जीवित संतान वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र घोषित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 का प्रारूप सार्वजनिक किया गया था। इस प्रारूप में यह प्रस्ताव शामिल था कि जिन अभ्यर्थियों की दो से अधिक जीवित संतान होंगी, उन्हें राज्य सरकार की सेवाओं में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। इस प्रस्ताव पर जनता और विभिन्न संगठनों की ओर से सुझाव एवं आपत्तियां भी प्राप्त हो रही थीं। इसी बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि इस प्रावधान को नए नियमों में शामिल नहीं किया जाए।

मुख्यमंत्री के इस फैसले को राज्य के युवाओं और नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि किसी व्यक्ति को केवल पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर सरकारी सेवा के अवसरों से वंचित करना उचित नहीं होगा। इसी कारण प्रस्तावित नियम को वापस लेने का निर्णय लिया गया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि पोर्टल पर उपलब्ध ड्राफ्ट को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और संशोधित प्रारूप तैयार कर पुनः प्रकाशित किया जाए। इसके बाद नए नियमों पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार युवाओं के हितों और समान अवसरों के सिद्धांत के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि हाल ही में जारी मसौदे में दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियों से बाहर रखने का प्रस्ताव सामने आने के बाद इस विषय पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी। कई सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और युवाओं ने इस प्रावधान पर पुनर्विचार की मांग की थी। उनका तर्क था कि रोजगार के अवसरों को परिवार के आकार से जोड़ना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अब यह विवादित प्रावधान नियमों का हिस्सा नहीं बनेगा। इससे उन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी, जिन्हें आशंका थी कि भविष्य में सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करते समय उन्हें इस शर्त के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह निर्णय युवाओं के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रिया अधिक समावेशी और समान अवसरों पर आधारित बनेगी। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि सरकार जनभावनाओं और सुझावों को महत्व देते हुए आवश्यक बदलाव करने के लिए तैयार है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें संशोधित सिविल सेवा नियमों पर टिकी हैं, जिन्हें जल्द ही नए प्रारूप के साथ सार्वजनिक किए जाने की संभावना है। राज्य के लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह निर्णय राहत और उम्मीद लेकर आया है तथा सरकारी सेवाओं में अवसरों के दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



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