पंसोखर के 30 लाख के मंगल भवन निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप,कच्ची ईंटों और कमजोर पिलरों पर खड़ा किया जा रहा ढांचा।
ग्रामीणों ने जनपद पंचायत में की लिखित शिकायत,14 इंच की जगह 9 इंच के पिलर बनाने का आरोप,विधायक और सीईओ ने दिए जांच के निर्देश।
बड़वारा,ग्रामीण खबर MP।
कटनी जिले की जनपद पंचायत बड़वारा अंतर्गत ग्राम पंचायत पंसोखर में मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद से लगभग 30 लाख रुपये की लागत से निर्मित हो रहे मंगल भवन एवं प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में शासन द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है तथा ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने जनपद पंचायत बड़वारा में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस भवन का निर्माण गांव के सार्वजनिक उपयोग और सामाजिक आयोजनों के लिए किया जा रहा है, वही भवन अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण स्थल पर गुणवत्ता की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है और जिम्मेदार अधिकारी भी अब तक इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे थे। शिकायत में कहा गया है कि भवन निर्माण में मजबूत और पकी हुई ईंटों की जगह पीली तथा मिट्टी से बनी कमजोर कच्ची ईंटों का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है, जो थोड़े समय में ही टूटने और कमजोर पड़ने लगती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता इतनी खराब है कि कई ईंटें हाथ से दबाने पर ही टूट रही हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भवन के पिलरों के निर्माण में भी भारी लापरवाही बरती जा रही है। स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी मानकों के अनुसार पिलरों की चौड़ाई 14 इंच निर्धारित की गई थी, लेकिन मौके पर मात्र 9 इंच के पिलर तैयार किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिलरों की चौड़ाई कम होने से भवन की मजबूती सीधे तौर पर प्रभावित होगी और भविष्य में यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य इसी तरह चलता रहा तो करोड़ों की योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक सुरक्षित रूप में कभी नहीं पहुंच पाएगा।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में सीमेंट और अन्य सामग्री की मात्रा में भी कटौती की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन निर्माण में गुणवत्ता के बजाय केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है ताकि कम लागत में अधिक भुगतान प्राप्त किया जा सके। गांव के लोगों ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे, लेकिन संबंधित जिम्मेदारों द्वारा शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब जब मामला सार्वजनिक हुआ है तो ग्रामीणों ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य गांवों में बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि इसी प्रकार भ्रष्टाचार और लापरवाही जारी रही तो योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा। लोगों ने कहा कि शासन द्वारा गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन कुछ ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारी मिलकर योजनाओं को भ्रष्टाचार का माध्यम बना देते हैं, जिससे जनता को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत बड़वारा की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभा सिंह ने तकनीकी टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोग की जा रही सामग्री, पिलरों की चौड़ाई तथा स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप कार्य होने की जांच कर शीघ्र प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार तकनीकी अमला निर्माण स्थल का निरीक्षण कर मापदंडों की जांच करेगा और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि शासकीय राशि के दुरुपयोग और निर्माण गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विधायक ने जिला स्तरीय अधिकारियों से चर्चा कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए ताकि आगे और अनियमितताएं न हो सकें। लोगों का कहना है कि यदि वर्तमान निर्माण को बिना सुधार के जारी रखा गया तो भविष्य में भवन की संरचना कमजोर साबित हो सकती है और जनहानि की संभावना भी उत्पन्न हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे जाएं तथा पूरे निर्माण कार्य का तकनीकी ऑडिट कराया जाए।
इधर ग्राम पंचायत पंसोखर के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ शीघ्र वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई और निर्माण कार्य में सुधार नहीं किया गया, तो वे प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वे गांव के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे और जरूरत पड़ी तो जिला मुख्यालय तक आंदोलन किया जाएगा।
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर चल रहे कई निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की नियमित निगरानी नहीं होती, जिसका फायदा उठाकर ठेकेदार मनमानी करते हैं। लोगों ने मांग की है कि पंचायत और जनपद स्तर पर निर्माण कार्यों की समय-समय पर स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
अब पूरे मामले में सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई बनकर न रह जाए, बल्कि दोषियों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई हो और निर्माण कार्य को तकनीकी मानकों के अनुसार दोबारा कराया जाए। यदि प्रशासन इस मामले में सख्ती दिखाता है तो यह भविष्य में अन्य निर्माण कार्यों में भी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक बड़ा संदेश साबित हो सकता है।

